सोमवार, 5 जनवरी 2026

AI का डार्क साइड: कैसे हैकर्स AI का इस्तेमाल करके अटैक कर रहे हैं और आप कैसे बचें

 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ एक टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि साइबर क्राइम का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। जहां एक तरफ AI हमारी सिक्योरिटी को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हैकर्स इसे इस्तेमाल करके अटैक्स को ज्यादा स्मार्ट, तेज़ और पर्सनलाइज्ड बना रहे हैं।

2025 में ही AI-पावर्ड अटैक्स में भारी उछाल देखा गया – जैसे AI से जेनरेटेड फिशिंग ईमेल्स में 67% बढ़ोतरी, डीपफेक वॉइस अटैक्स में 81% ग्रोथ, और मालवेयर में AI का इस्तेमाल 23% केसों में। ट्रेंड माइक्रो और वेरिज़ॉन की रिपोर्ट्स के अनुसार, AI अब अटैक्स को ऑटोमेट कर रहा है, जिससे एक सिंगल हैकर महीने भर में 17 ऑर्गेनाइजेशंस को टारगेट कर सकता है। भारत में भी ये थ्रेट्स बढ़ रहे हैं, खासकर फाइनेंस, हेल्थकेयर और गवर्नमेंट सेक्टर में।

इस लंबी पोस्ट में हम डिटेल में समझेंगे कि हैकर्स AI का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं, रियल वर्ल्ड एग्जाम्पल्स, स्टैटिस्टिक्स, और सबसे जरूरी – आप या आपका बिजनेस कैसे सुरक्षित रह सकता है। चलिए शुरू करते हैं!


AI का डार्क साइड: हैकर्स इसे कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं?

AI हैकर्स के लिए "गेम-चेंजर" बन गया है क्योंकि ये अटैक्स को स्केलेबल, एडाप्टिव और ह्यूमन-Лाइक बना देता है। पहले जहां हैकर्स को कोडिंग स्किल्स या मैन्युअल एफर्ट चाहिए होता था, अब AI टूल्स जैसे ChatGPT, Claude या ओपन-सोर्स मॉडल्स से वो सब ऑटोमेट हो रहा है। मुख्य तरीके ये हैं:

  1. AI-पावर्ड फिशिंग और स्पीयर फिशिंग हैकर्स AI का इस्तेमाल करके हाइपर-पर्सनलाइज्ड ईमेल्स, मैसेजेस या स्क्रिप्ट्स जेनरेट करते हैं। AI विक्टिम की सोशल मीडिया प्रोफाइल, ईमेल हिस्ट्री या पब्लिक डेटा एनालाइज करके ऐसा कंटेंट बनाता है जो बिल्कुल रियल लगता है – जैसे बॉस की स्टाइल में ईमेल या फ्रेंड की तरह मैसेज।
    • 2025 में AI-जेनरेटेड फिशिंग ईमेल्स 67% बढ़े (SQ Magazine रिपोर्ट)।
    • LLM (Large Language Models) से स्पीयर फिशिंग अब पर्सोना-बेस्ड है – ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) से विक्टिम की डिटेल्स निकालकर टारगेटिंग।
    • एग्जाम्पल: नॉर्थ कोरियन हैकर्स AI डीपफेक्स यूज करके US में हाई-पेइंग रिमोट जॉब्स हासिल कर रहे हैं (PCMag रिपोर्ट)।

Deepfake Detection: What is Phishing 3.0 and How Can You Prepare?

Deepfake Phishing - Emerging New Face of Cybercrime - Blog.ICSS

  1. डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग अटैक्स डीपफेक टेक्नोलॉजी से हैकर्स वीडियो, वॉइस या इमेज क्लोन करते हैं। सिर्फ 15-सेकंड की ऑडियो/वीडियो से CEO की नकल करके पैसे ट्रांसफर करवाना या सेंसिटिव इंफो लेना आसान हो गया।
    • 2025 में डीपफेक-एनेबल्ड विशिंग (वॉइस फिशिंग) 1600% बढ़ी (Cybersecurity News)।
    • बिजनेस ईमेल कंप्रोमाइज (BEC) में वॉइस क्लोनिंग 81% केसों में यूज हुई।
    • रियल एग्जाम्पल: $25.6 मिलियन का डीपफेक फ्रॉड केस, जहां AI से CFO की वॉइस क्लोन करके ट्रांसफर करवाया गया।
    • 2026 में डीपफेक-एज-अ-सर्विस (DaaS) और रियल-टाइम डीपफेक Zoom/Teams कॉल्स कॉमन होंगे।

New Deep fake Phishing Scam

  1. AI-जेनरेटेड मालवेयर और ऑटोनॉमस अटैक्स हैकर्स AI से मालवेयर कोड जेनरेट करते हैं जो खुद एडाप्ट होता है – डिफेंस को एनालाइज करके एवेड करता है।
    • 2025 में 23% मालवेयर पेलोड्स AI-एडाप्टिव थे।
    • Anthropic की रिपोर्ट: एक सिंगल क्रिमिनल ने AI यूज करके रैंसमवेयर जेनरेट किया और बेसिक कोडिंग स्किल्स से बड़े अटैक्स किए।
    • एजेंटिक AI (ऑटोनॉमस AI) अब रेकॉन्सेंस, एक्सप्लॉइट और डेटा एक्सफिल्ट्रेशन खुद करता है – ह्यूमन की जरूरत कम।
    • एग्जाम्पल: EvilAI कैंपेन, जहां AI-जेनरेटेड कोड से क्रिटिकल सेक्टर्स ब्रिच हुए।



  1. अन्य उभरते थ्रेट्स
    • प्रॉम्प्ट इंजेक्शन: AI सिस्टम्स को मैनिपुलेट करके सिक्योरिटी बायपास।
    • डेटा पॉइजनिंग: AI मॉडल्स को गलत डेटा फीड करके कमजोर बनाना।
    • ऑटोमेटेड रेकॉन्सेंस: AI से वल्नरेबिलिटी स्कैन और टारगेट सिलेक्शन।
    • 2025 में 14% बड़े ब्रिचेस फुली ऑटोनॉमस AI से हुए।

ये थ्रेट्स इसलिए खतरनाक हैं क्योंकि AI बैरियर को कम कर रहा है – अब नॉविस हैकर्स भी प्रोफेशनल लेवल अटैक्स कर सकते हैं। ग्लोबल कॉस्ट: AI-पावर्ड ब्रिच का एवरेज कॉस्ट $5.72 मिलियन (Verizon DBIR 2025)।

आप कैसे बचें? प्रैक्टिकल डिफेंस स्ट्रेटजीज

अच्छी खबर ये है कि AI ही डिफेंस का भी सबसे बड़ा टूल है। 2026 में रेजिलिएंस (तेज़ रिकवरी) पर फोकस करें, न कि सिर्फ प्रिवेंशन पर। यहां स्टेप-बाय-स्टेप गाइड:

  1. एम्प्लॉयी अवेयरनेस और ट्रेनिंग
    • रेगुलर सिमुलेटेड AI फिशिंग और डीपफेक ट्रेनिंग करवाएं।
    • साइन चेक करें: लाइटिंग, लिप-सिंक, आई मूवमेंट में गड़बड़ी।
    • रूल: हर अर्जेंट रिक्वेस्ट (पेमेंट, पासवर्ड) को दूसरे चैनल से वेरिफाई करें।

AI Cyber Defense: Anticipate and Neutralize Cyber Threats | SmartDev

  1. टेक्निकल डिफेंस
    • AI-बेस्ड सिक्योरिटी टूल्स: EDR/XDR, थ्रेट इंटेलिजेंस जो AI अटैक्स डिटेक्ट करें।
    • मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA): फिशिंग-रेसिस्टेंट MFA (जैसे FIDO2) यूज करें।
    • डीपफेक डिटेक्शन टूल्स: मेटाडेटा एनालिसिस और आर्टिफैक्ट चेक।
    • Zero Trust मॉडल: कभी ट्रस्ट न करें, हमेशा वेरिफाई करें।
    • पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी: फ्यूचर थ्रेट्स के लिए तैयार रहें।
  2. ऑर्गेनाइजेशनल स्टेप्स
    • AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनाएं – अपने AI टूल्स को सिक्योर करें।
    • रेगुलर ऑडिट और SBOM (Software Bill of Materials) यूज करें।
    • ऑफलाइन बैकअप और इंसिडेंट रिस्पॉन्स प्लान रखें।
    • भारत में: DPDP एक्ट, CERT-In गाइडलाइंस फॉलो करें।
  3. पर्सनल लेवल टिप्स
    • स्ट्रॉंग, यूनिक पासवर्ड और पासवर्ड मैनेजर यूज करें।
    • संदिग्ध लिंक्स/कॉल्स पर क्लिक न करें।
    • प्राइवेसी सेटिंग्स टाइट रखें – कम पब्लिक डेटा, कम टारगेटिंग।

 AI आर्म्स रेस में जीतने के लिए :-

2026 AI की आर्म्स रेस का साल है – हैकर्स AI यूज कर रहे हैं, लेकिन डिफेंडर्स भी। जो ऑर्गेनाइजेशंस AI को अपनी सिक्योरिटी में इंटीग्रेट करेंगे, वो आगे रहेंगे। छोटी-छोटी आदतें जैसे अवेयरनेस, अपडेट्स और वेरिफिकेशन बड़ा फर्क डालेंगी।

अगर आपके पास कोई स्पेसिफिक क्वेश्चन है या और डिटेल चाहिए (जैसे कोई टूल रेकमेंडेशन), तो कमेंट करें! अपने दोस्तों से शेयर करें और साइबर सेफ रहें। 🇮🇳🔒

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025

Weekly Recap: हॉट CVEs, npm वर्म रिटर्न्स, Firefox RCE, M365 ईमेल रेड और भी बहुत कुछ

 


                                                     हैकर्स अब दरवाज़े नहीं तोड़ते 

आज के साइबर हमले पहले जैसे नहीं रहे।हैकर्स अब बल प्रयोग नहीं करते — वे वही टूल्स, ऐप्स और सिस्टम इस्तेमाल करते हैं जो हम रोज़ बिना सोचे इस्तेमाल करते हैं:

  • कोड पैकेज

  • क्लाउड अकाउंट

  • ईमेल

  • चैट ऐप

  • फोन

  • “ट्रस्टेड पार्टनर”

एक गलत डाउनलोड आपकी Keys लीक कर सकता है।
एक कमजोर वेंडर कई कंपनियों को एक साथ एक्सपोज़ कर सकता है।
एक गेस्ट इनवाइट या एक लिंक — और आपकी मेल, चैट, रिपोज़ और सर्वर खतरे में।

नीचे दी गई हर खबर ये याद दिलाती है कि हमारे “सेफ” टूल्स ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हो सकते हैं।


इस हफ्ते का सबसे बड़ा खतरा (Threat of the Week)

Shai-Hulud वापस आया — और इस बार और भी खतरनाक

npm registry पर दूसरी बार एक self-replicating worm ने हमला किया।
नाम था — “Sha1-Hulud: The Second Coming”

इस हमले का असर:

  • 800+ npm पैकेज संक्रमित

  • 27,000 GitHub रिपोज़िटरी प्रभावित

  • API keys, cloud credentials और GitHub secrets चोरी

  • GitHub Actions को hack करके C2 (Command & Control) बनाना

  • हर npm पैकेज को backdoor करके malicious payloads के साथ republish करना

  • Worm की तरह supply chain में फैलना

मैलवेयर Node.js को bypass करके Bun install करता है ताकि traditional defenses इसे पकड़ न सकें।

GitGuardian ने 294,842 secret leaks पाए, जिनमें शामिल थे:

  • GitHub access tokens

  • Slack webhooks

  • AWS IAM keys

  • OpenAI Project API keys

  • Claude API keys

  • Google API keys

  • GitLab tokens

एक compromised डेवलपर पैकेज ने Trigger.dev की GitHub organization तक unauthorized access दे दिया।

PyPI (Python repo) इस हमले से प्रभावित नहीं हुआ।


इस हफ्ते की टॉप साइबर न्यूज़

1. ToddyCat अब Outlook ईमेल और M365 Tokens चुरा रहा है

APT ग्रुप ToddyCat अब सिर्फ ब्राउज़र क्रेडेंशियल ही नहीं, बल्कि:

  • Outlook mail archives

  • Microsoft 365 access tokens

चुरा रहा है।
यह इसका 2025 में दूसरा बड़ा रूपांतरण है।


2. Qilin Ransomware — एक MSP को हैक कर 28 Finance कंपनियाँ प्रभावित

South Korea में एक बड़े सप्लाई चेन अटैक में:

  • Qilin Ransomware

  • North Korean actors (Moonstone Sleet)

मिलकर एक MSP को हैक करते हैं।
एक ही breach से 1 million files और 2TB डेटा चोरी।


3. CISA का अलर्ट — Messaging Apps को टारगेट करने वाला Spyware

Spyware व RATs का इस्तेमाल कर:

  • High-value व्यक्तियों

  • Government, Military, Political Officials

को टारगेट किया जा रहा है।
सोशल इंजीनियरिंग से spyware फ़ोन में इंस्टॉल कराया जा रहा है।


4. WSUS Vulnerability Exploit कर ShadowPad Malware डिप्लॉय

Threat actors ने Windows Server Update Services (CVE-2025-59287) का दुरुपयोग किया।
curl.exe और certutil.exe से ShadowPad डाउनलोड कर सिस्टम में इंस्टॉल किया गया।


5. Microsoft Teams Guest Access में बड़ा Security Gap

Guest mode में security hosting tenant से लागू होती है, आपके संगठन की नहीं
इससे Microsoft Defender की protections को bypass करना आसान हो जाता है।




Trending CVEs — इस हफ्ते की सबसे खतरनाक कमजोरियां

हैकर्स नए CVEs का इस्तेमाल घंटों में कर लेते हैं।
एक missed update = एक बड़ा breach।

इस हफ्ते की high-risk vulnerabilities:

  • Fluent Bit vulnerabilities

  • vLLM

  • Tenda router flaws

  • ASUS MyASUS और ASUS Routers

  • Angular HttpClient flaw

  • NVIDIA Isaac-GR00T

  • GitLab CE/EE

  • Next.js में unauthenticated DoS vulnerability


दुनिया भर की साइबर खबरें (Short Highlights)

🇵🇱 पोलैंड ने रूसी नागरिक को हैकिंग के आरोप में पकड़ा

IT सिस्टम में घुसकर डेटा छेड़छाड़ करने की कोशिश।

🇺🇸 FCC ने Broadcasters को networks secure करने की चेतावनी दी

Compromised transmitter links का misuse कर गलत content broadcast हुआ।

Firefox WebAssembly vulnerability से Remote Code Execution का खतरा

एक single-line बग पूरा ब्राउज़र breach कर सकता था।

Cryptomixer shutdown — €1.3B Bitcoin laundering network खत्म

Europol ने massive crypto mixing ऑपरेशन बंद किया।

South Korea — North Korea से hacking tools खरीदने वाला व्यक्ति गिरफ्तार

Illegal server operations के लिए tools खरीदे थे।

AI compute का misuse — free AI tiers का उपयोग कर automated cyber attacks

China-based setup ने free AI compute chain करके attacks automate किए।

Fake Battlefield 6 game से stealer malware फैलाया जा रहा है

Game installer में cryptocurrency, Discord और browser credentials चोरी।

Nation-State actors में सहयोग बढ़ा

Lazarus, Gamaredon और Kimsuky जैसे groups का infrastructure overlap।

Anthropic: Claude Opus 4.5 prompt injection के खिलाफ अधिक मजबूत

Malicious coding requests में लगभग 100% refusal।

Uhale Android Photo Frames में 17 critical flaws

Devices को पूरी तरह hack कर malware spreading तक संभव।

Operation South Star — China में ZipperDown का उपयोग कर mobile attacks

Email exploit के ज़रिए malicious APK install करवाई गई।

Malicious LLMs (WormGPT, KawaiiGPT) cybercriminals को बेचें जा रहे हैं

Phishing, malware creation और reconnaissance आसानी से generate कर रहे हैं।

 Cybersecurity Tools

1. LUMEN — Offline Windows Event Log Analyzer

  • SIGMA detections

  • Storyline correlation

  • IOC extraction

  • Local, private log analysis

2. Pi-hole — Network-wide DNS Blocker

  • Ads और trackers ब्लॉक

  • No client software needed

  • Full DNS control

(Disclaimer: केवल learning और research के लिए)


निष्कर्ष

आज के साइबर हमले दिखाते हैं कि:

अब कोई भी कंपनी “बहुत छोटी” या “बहुत महत्वहीन” नहीं है।

अक्सर breach इसलिए होते हैं क्योंकि:

  • एक package चेक नहीं हुआ

  • एक vendor verify नहीं किया

  • एक “temporary token” कभी revoke नहीं हुआ

  • एक guest account किसी का नहीं था

हैकर्स इन्हीं छोटी गलतियों का फायदा उठाते हैं।

इस रिपोर्ट को पढ़कर आगे मत बढ़िए।
आज ही एक छोटा कदम उठाइए:

  • एक key rotate करें

  • एक vendor की access सीमित करें

  • Guest accounts review करें

  • Update path secure करें

  • एक high-risk CVE patch करें

“हम करेंगे” और “हमने कर दिया”—
यही फर्क आपको अगला breach बनने से बचाता है।

गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

भारत ने धोखाधड़ी और दुरुपयोग को रोकने के लिए मैसेजिंग ऐप्स को सिर्फ़ एक्टिव सिम कार्ड के साथ काम करने का आदेश दिया है

 


भारत के दूरसंचार विभाग (DoT) ने नई गाइडलाइन जारी की — अब मैसेजिंग ऐप बिना एक्टिव सिम के इस्तेमाल नहीं होंगे

भारत के Department of Telecommunications (DoT) ने ऐप-आधारित कम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए नई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब WhatsApp, Telegram, Snapchat, Signal जैसे ऐप बिना यूज़र के मोबाइल नंबर से जुड़े एक्टिव SIM के उपयोग नहीं किए जा सकेंगे।

DoT ने इन ऐप्स को 90 दिनों के अंदर इन नियमों का पालन करने का आदेश दिया है।

यह बदलाव Telecommunications (Telecom Cyber Security) Rules, 2024 में संशोधन के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत में होने वाले फिशिंग, ऑनलाइन स्कैम, और साइबर फ्रॉड को रोकना है। सरकार का कहना है कि अपराधी दूरसंचार पहचान (mobile number) का दुरुपयोग कर रहे हैं, खासकर क्रॉस-बॉर्डर फ्रॉड करने के लिए।


क्यों ज़रूरी हुआ SIM-Binding नियम?

DoT के अनुसार:

  • मैसेजिंग और कॉलिंग ऐप्स के अकाउंट्स SIM हटाने, बंद होने या विदेश ले जाने के बाद भी चलते रहते हैं

  • इससे अपराधियों को मौका मिलता है कि वे भारत के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके गुमनाम तरीके से धोखाधड़ी करें

  • “डिजिटल अरेस्ट”, सरकारी विभाग बनकर कॉल करना, निवेश धोखाधड़ी, आदि ज्यादातर ऐसे ही नंबरों से किए जाते हैं

  • वेब/डेस्कटॉप पर लॉन्ग-सेशन चलने से अपराधी मूल SIM या असली डिवाइस के बिना भी अकाउंट कंट्रोल करते रहते हैं

सरकार का कहना है कि एक बार भारत में QR-Code से लॉगिन करने के बाद, ऐसी वेब सेशन लगातार चलते रहते हैं, जिससे फ़्रॉड को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।


नए नियमों में क्या-क्या शामिल है?

सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार—

 1. ऐप हमेशा डिवाइस में मौजूद एक्टिव SIM से लिंक रहना चाहिए

  • ऐप तभी चले जब फोन में उसी नंबर का SIM कार्ड ऐक्टिव और मौजूद हो

  • SIM हटते ही ऐप अपने आप बंद होना चाहिए

 2. वेब/डेस्कटॉप लॉगिन हर 6 घंटे में ऑटो-लॉगआउट होगा

  • हर 6 घंटे बाद दोबारा QR कोड से लॉगिन करना होगा

  • इससे अपराधियों को बार-बार अपनी पहचान साबित करनी पड़ेगी, जिससे धोखाधड़ी करना मुश्किल होगा

 3. हर अकाउंट सिर्फ KYC-वेरिफाइड SIM से ही चल सकेगा

  • यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी भारतीय नंबर बिना असली पहचान के किसी भी घोटाले में इस्तेमाल न हो सके

  • सरकार नंबरों को ट्रेस कर पाएगी जो फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, लोन स्कैम आदि में उपयोग होते हैं


यह नियम पहले किन ऐप्स पर लागू था?

यह SIM-बाइंडिंग और ऑटो-लॉगआउट सिस्टम पहले सिर्फ—

  • बैंकिंग ऐप्स

  • UPI ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm)

पर लागू था।

अब यह मैसेजिंग ऐप्स पर भी लागू होगा।

WhatsApp और Signal ने इस बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।


Mobile Number Validation (MNV) प्लेटफ़ॉर्म भी आएगा

कुछ दिन पहले DoT ने घोषणा की थी कि एक नया Mobile Number Validation (MNV) प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य—

  • म्यूल अकाउंट रोकना

  • पहचान धोखाधड़ी रोकना

  • मोबाइल नंबर और डिजिटल सर्विस के बीच असली लिंक की पुष्टि करना

यह सत्यापन TIUE (Telecom Identifier User Entity) या किसी सरकारी एजेंसी द्वारा किया जा सकेगा।

सरकार का कहना है कि यह सिस्टम:

✔️ डिजिटल ट्रांजेक्शन में भरोसा बढ़ाएगा
✔️ मोबाइल नंबर के गलत उपयोग को रोकेगा
✔️ पूरी प्रक्रिया प्राइवेसी-फ्रेंडली रहेगी

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025

Chrome Zero-Day ने फैलाया LeetAgent: Operation ForumTroll का नया साइबर स्पोर्ट

 मार्च 2025 में सामने आई एक Google Chrome zero-day (CVE-2025-2783) कमजोरियों का फायदा उठाकर एक लक्षित जासूसी अभियान (Operation ForumTroll) चला और इस दौरान एक अनोखा स्पाईवेयर-किट सामने आया जिसे Kaspersky ने LeetAgent नाम दिया।

यह हमला दर्शाता है कि कैसे ब्राउज़र-सुरक्षा में मौजूद एक छोटी सी खामी राष्ट्रीय और संस्थागत स्तर पर संवेदनशील जानकारी लीक कर सकती है। इस रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे हमला कैसे हुआ, LeetAgent क्या कर सकता है, इसके पीछे कौन-से समूह हो सकते हैं, और आप/आपकी संस्था इससे कैसे बचें।


 (TL;DR)

 कमजोरियाँ: CVE-2025-2783 (sandbox escape) — Chrome में शेलडो (sandbox) तोड़ने की क्षमता।

 अभियान: Operation ForumTroll — लक्ष्य: रूस/बेलारूस स्थित मीडिया, विश्वविद्यालय, रिसर्च सेंटर, सरकारी संस्थान और वित्तीय संस्थान।

 वितरण तरीका: निजी (spear-phishing) ईमेल जिनमें शोर्ट-लिव्ड लिंक होते थे अक्सर “Primakov Readings” जैसी फ़ोरम-लिंक।

 अति महत्त्वपूर्ण: लिंक पर क्लिक ही exploit को ट्रिगर करने के लिए काफी था (Chrome/Chromium ब्राउज़र)

 परिणाम: exploit एक loader गिराता है जो आगे LeetAgent स्पाईवेयर लॉन्च करता है और C2 के साथ HTTPS पर संवाद करता है।

 Memento Labs और उसका संदर्भ एक विवादास्पद इतिहास

मालवेयर फ़ैमिली के स्रोत में जो कंपनी जुड़ी दिखती है वो है Memento Labs (mem3nt0) — मिलान स्थित एक आईटी/सर्विस प्रोवाइडर, जिसकी जड़ों में पुरानी कंपनी HackingTeam भी आती है। HackingTeam के टूल्स और लीक्स ने पहले भी विवाद और आलोचना पैदा किए थे इसलिए Memento Labs के नाम का जुड़ना सुरक्षा समुदाय में चिंताएँ बढ़ाता है।

यह जरूरी है: किसी भी संगठन के नाम को सीधे दोषी साबित करने के लिए बहुत सावधानी चाहिए पर सार्वजनिक शोध यह दर्शाता है कि LeetAgent के विकास/वितरण में Memento Labs-संबंधी टूल्स के निशान मिले हैं।

हमला कैसे काम करता है चरण-दर-चरण (Attack Chain)

 Spear-phishing lure: सर्वप्रथम निशाना बनाए गए व्यक्ति को टार्गेटेड ईमेल भेजा जाता है संदेश में छोटा, व्यक्तिगत लिंक होता है (जैसे Primakov Readings)

 Validator Script: लिंक पर जाने पर ब्राउज़र एक छोटा script चलाता है जो यह जाँचता है कि विज़िटर असली यूज़र है या कोई analysis sandbox/VM

 Exploit (CVE-2025-2783): यदि जाँच सफल होती है, तो Chrome की sandbox से बाहर निकलने के लिए exploit detonates होता है यानी attacker को remote code execution मिल जाता है।

 Loader डिप्लॉय: exploit की मदद से एक loader गिराया जाता है जो आगे LeetAgent (या कभी-कभी Trinper/Dante जैसे अन्य मॉड्यूल) लॉन्च करता है।

 C2 कम्युनिकेशन: LeetAgent HTTPS के जरिए command-and-control सर्वर से जुड़ता है और निर्देश पाता है जैसे की फाइल चोरी, कीलॉगिंग, कमांड निष्पादन आदि।

 LeetAgent — क्या करता है और किन कमांड्स का समर्थन करता है

Kaspersky के विश्लेषण के अनुसार LeetAgent काफी सक्षम backdoor है। यह कई तरह के निर्देशों को संभालता है:

 0xC033A4D (COMMAND) – cmd.exe के माध्यम से कमांड चलाना

 0xECEC (EXEC) – कोई प्रोसेस execute करना

 0x6E17A585 (GETTASKS) – चल रहे tasks की सूची देना

 0x6177 (KILL) – किसी task को रोकना

 0xF17E09 (FILE \x09) – फ़ाइलों में लिखना

 0xF17ED0 (FILE \xD0) – फ़ाइल पढ़ना

 0x1213C7 (INJECT) – shellcode inject करना

 0xC04F (CONF) – कम्युनिकेशन पैरामिटर्स सेट करना

0xD1E (DIE) – quit/exit

 0xCD (CD) – current working directory बदलना

 0x108 (JOB) – keylogger/फाइल-थीफ़र सेट-अप करना; विशिष्ट एक्स्टेंशन्स (*.doc, *.xls, *.ppt, *.rtf, *.pdf, *.docx, *.xlsx, *.pptx) वाली फाइलें इकट्ठा करना

 LeetAgent का व्यवहार modular है यह loader के जरिए आगे अन्य घटक भी लोड कर सकता है, जिससे हमलावर को और क्षमताएँ मिलती हैं (जैसे Dante spyware का लांच)

 क्या यह नया है? — इतिहास और कनेक्शन

Kaspersky ने बताया कि LeetAgent के कोड-टखने (code artifacts) 2022 तक trace होते हैं यानी यह एक विकसित हो रही टूलकिट है। Positive Technologies के शोध में भी इसी तरह की गतिविधि (TaxOff/Trinper) का विवरण मिला और कई संकेत बताते हैं कि ये अभियाने आपस में जुड़े हुए हैं।

विशेषतः Dante (पहले RCS जैसा) और StealthServer/Trinper जैसी backdoors के साथ shared tradecraft (COM-hijacking persistence, file paths, font file में छिपे डेटा आदि) दिखता है जो यह संकेत देता है कि संभवतः एक ही actor/toolset पीछे काम कर रहा है।

 लक्षित क्षेत्र और मक़सद कौन निशाना बन रहा है?

Kaspersky के अवलोकन के अनुसार लक्षित संस्थाएँ:

 मीडिया हाउसेस (news outlets)

 यूनिवर्सिटीज़ और रिसर्च सेंटर

 सरकारी विभाग और सार्वजनिक संस्थाएँ

 वित्तीय संस्थान

 इन अभियानों का प्राथमिक उद्देश्य जासूसी (espionage) है संवेदनशील अध्यन, नीतिगत दस्तावेज़, इंटरनल कम्युनिकेशन और मीडिया-रिलेटेड सामग्रियाँ चुराना। लक्षित क्षेत्रों के आधार पर यह स्पष्ट है कि यह अभियान रणनीतिक बुद्धि/नैरेटिव मॉनिटरिंग पर केंद्रित है  कि महज वित्तीय लाभ पर।

 तकनीकी संकेत (IOCs) — क्या देखना चाहिए

(ब्लॉग पाठकों के लिए सरल और उपयोगी संकेत; सुरक्षा टीम इन्हें अपने SIEM/EDR में जोड़ें)

 संदिग्ध शोर्ट-लिव्ड लिंक जिन्हें Primakov/Forum जैसी प्रासंगिकता के साथ भेजा गया हो

 ब्राउज़र से अजीब-सी process creation/loader activity (explorer/browser child processes spawning unknown binaries)

 HTTPS C2 कनेक्शन्स जिनकी destination domains संदिग्ध/नए बने हों (timezone, reputation low)

 फ़ाइल ऑपरेशन्स जो विशेष एक्सटेंशन्स (.doc, .xls, .pdf) की खोज करके त्वरित exfiltration करें

 दर्शनीय persistence indicators: COM hijack entries, suspicious scheduled tasks, unknown autorun entries, font file modification

 Dante और अन्य मॉड्यूल एक बड़ी छवि

LeetAgent कभी-कभी और बड़े, ज्यादा sophisticated spyware (जैसे Dante) के लिए stepping stone का काम करता है। Dante जैसी प्लेटफ़ॉर्म्स में anti-analysis, obfuscation, anti-VM checks होते हैं वे forensic परीक्षण  निगरानी से बचने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि:

 LeetAgent initial foothold प्रदान करता है

 Dante जैसे मॉड्यूल बाद में लोड किए जाते हैं (जहाँ और अधिक संगठनात्मक डेटा इकट्ठा/कर्मान्वित किया जाता है)

 यह मॉड्यूलर रैंसम/spyware approach एक व्यापक, लंबे समय तक चलने वाली जासूसी रणनीति दर्शाती है।

 Attribution — कौन कर रहा है? (क्या कहा जा सकता है)

Operation ForumTroll को विश्लेषकों ने अक्सर Russia-focused अभियान के रूप में देखा है। समूहों की भाषा-कुशलता (Russian proficiency), स्थानीय context-awareness और लक्ष्य चुनने के पैटर्न ने शोधकर्ताओं को यह संकेत दिया है कि अभिनेता की प्राथमिक संचालन theatre रूस-आसपास रही है।

हालाँकि attribution मुश्किल है खासकर जब उपकरण और share किए गए code के टुकड़े विभिन्न actor समूहों में घूमते हैं पर वर्तमान संकेत बताते हैं कि ForumTroll / TaxOff / Prosperous Werewolf जैसे नामों के अंतर्गत यह cluster सक्रिय रहा है और कई बार एक दूसरे के tradecraft से ओवरलैप करता दिखा है।

 बचाव और निवारण (Practical Mitigations) — क्या करें, क्या  करें

1. ब्राउज़र और सॉफ़्टवेयर अपडेट रखें

 सबसे पहला और सरल कदम: Chrome और Chromium-based browsers को अपडेट रखें — vendor patches अक्सर zero-day exploitation का सबसे प्रभावी इलाज हैं।

2. ईमेल सुरक्षा और user awareness

Personalized spear-phishing से बचने का सबसे अच्छा तरीका है user training — लिंक्स पर क्लिक करने से पहले sender और URL चेक करें।

EDR/Email Gateway पर URL rewriting, attachment sandboxing और macro-blocking enable करें।

3. Application sandboxing और exploit mitigation

Browser hardening (site isolation, strict sandboxing flags) enable करें।

 Exploit mitigation features (ASLR, DEP) और enterprise-level exploit protection चालू रखें।

 4. Monitoring, Detection & EDR

HTTPS-based C2 detection के लिए SSL/TLS inspection consider करें (privacy और legality ध्यान में रखकर)

 EDR solutions में behavior-based rules (suspicious child process creation, unusual command execution) जोड़ें।

 5. Least Privilege और Network Segmentation

 Sensitive systems पर प्रशासनिक privileges सीमित रखें।

 Critical assets को segmented VLAN पर रखें ताकि lateral movement रोकें।

 6. Incident Response Plan

संभावित compromise के लिए playbooks तैयार रखें — isolating affected hosts, memory forensics, network captures, threat hunting lists

निष्कर्ष सीख और आगे की राह

Operation ForumTroll और LeetAgent की घटनाएँ हमें यह याद दिलाती हैं कि आधुनिक साइबर खतरे अब बहुत अधिक लक्षित और तीव्र हैं। एक छोटी कमी (जैसे ब्राउज़र sandbox escape) भी बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय-स्तरीय जासूसी की चाबी बन सकती है।

सरल संदेश:

अपडेट रखें, जागरूक रहें, और निगरानी को प्राथमिकता दें

तकनीकी उपायों के साथ-साथ मानव-फील्डिंग (training, phishing simulations) पर भी निवेश करें।

 

 

 

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